गोड्डा में सोलर पंप के नाम पर साइबर ठगी: आंगनबाड़ी सेविका के खाते से उड़ाए 19,000 रुपये

गोड्डा (झारखंड): देश भर में साइबर अपराध को लेकर जारी जागरूकता अभियानों के बावजूद साइबर अपराधियों का दुस्साहस कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ठग रोज नए-नए पैंतरे अपनाकर आम और भोले-भाले लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला झारखंड के गोड्डा जिले के देवडांड थाना अंतर्गत बाघमारा पंचायत के केंदुआ गांव से सामने आया है, जहां एक आंगनबाड़ी सेविका को सरकारी योजना का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने हजारों रुपये का चूना लगा दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
कैसे रची गई ठगी की साजिश?
पीड़ित आंगनबाड़ी सेविका की पहचान शिला हेम्ब्रम के रूप में हुई है। घटना की शुरुआत सुबह लगभग 10 बजे हुई, जब शिला हेम्ब्रम के मोबाइल पर उनके विभाग की सुपरवाइजर ‘कोशी’ (मोबाइल नंबर: 9598666614) के नाम से एक कॉल आया। सुपरवाइजर से बात होने के कुछ ही देर बाद उनके पास एक अन्य अनजान नंबर (9229499845) से फोन आया।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने सेविका से पूछा कि क्या उनका आंगनबाड़ी केंद्र किसी किराए के मकान में संचालित होता है? इसके बाद ठग ने उन्हें झांसे में लेते हुए कहा कि सरकार की तरफ से उनके केंद्र पर सोलर पंप लगवाने के लिए राशि स्वीकृत हुई है और उस पैसे को ट्रांसफर करने के लिए उन्हें ऑनलाइन पेमेंट ऐप ‘फोनपे’ (PhonePe) नंबर की आवश्यकता है।
भतीजे का नंबर देना पड़ा भारी
चूंकि सेविका शिला हेम्ब्रम स्वयं स्मार्टफोन या फोनपे का इस्तेमाल नहीं करती थीं, इसलिए उन्होंने सोलर पंप की राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने भतीजे मनोज हांसदा का फोनपे नंबर (9334755216) ठगों को दे दिया। इसके बाद निश्चिंत होकर सेविका अपने खेत के काम के लिए निकल गईं।
नंबर मिलते ही अपराधियों ने अपनी साजिश को अंजाम देना शुरू किया। उन्होंने भतीजे की पत्नी और सेविका के मोबाइल पर एक संदिग्ध लिंक भेजा और कहा कि पैसे प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करना अनिवार्य है। जैसे ही परिजनों ने झांसे में आकर उस लिंक पर क्लिक किया, खाते से पैसे कटने के मैसेज आने शुरू हो गए।
तीन किस्तों में साफ की गई रकम
साइबर ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते में सेंध लगाकर तीन अलग-अलग बार में कुल लगभग 19,000 रुपये उड़ा लिए:
- पहली किस्त: 7,758 रुपये
- दूसरी किस्त: 5,999 रुपये
- तीसरी किस्त: 4,958 रुपये
लगातार खाते से पैसे कटने के मैसेज देखकर परिवार के होश उड़ गए। जब तक वे स्थिति को समझ पाते, तब तक ठगों ने पूरा खाता खाली कर दिया था। घटना के बाद पीड़िता और उनका परिवार सदमे में है।
सरकारी योजनाओं के नाम पर बढ़ रहा है साइबर फ्रॉड
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों को ठगने के लिए सरकारी योजनाओं, सोलर पंप सब्सिडी, और विभागीय अधिकारियों का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। वे लोगों का भरोसा जीतने के लिए सुपरवाइजर या बड़े अधिकारियों का हवाला देते हैं, जिससे लोग आसानी से उनके बुने जाल में फंस जाते हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान नंबर से आए SMS या व्हाट्सएप लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें।
- पैसे प्राप्त करने के लिए PIN की जरूरत नहीं: यह बात हमेशा याद रखें कि किसी से पैसे प्राप्त (Receive) करने के लिए कभी भी UPI PIN दर्ज करने या लिंक पर क्लिक करने की आवश्यकता नहीं होती। PIN केवल पैसे भेजने (Send) के समय ही डाला जाता है।
- विभागीय पुष्टि करें: यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी या सुपरवाइजर बताकर पैसों के लेन-देन की बात करे, तो तुरंत अपने स्तर पर संबंधित कार्यालय से इसकी पुष्टि करें।
- तत्काल शिकायत दर्ज कराएं: यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
