चांदील बांध के फाटक खुलने से जमशेदपुर में तबाही: बिना पूर्व सूचना घुसा पानी, कई निचले इलाकों में बाढ़ का संकट

जमशेदपुर:
बीती रात जमशेदपुर शहर के कई इलाकों के लिए एक भयानक सपने की तरह गुजरी। चांदील बांध (Chandil Dam) के कई फाटक अचानक खोले जाने के कारण स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया। इसके चलते जमशेदपुर के प्रमुख निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
बाढ़ की सबसे गंभीर मार शास्त्री नगर (Shastri Nagar) के निचले हिस्से, आदित्यपुर(Aditiyapur) और बागबेड़ा (Bagbeda) के निचले क्षेत्रों पर पड़ी है। इसके अलावा कई अन्य तटीय बस्तियों में भी पानी तेज़ी से भर गया। बीती रात जब लोग अपने-अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक नदियों का बढ़ा हुआ जलस्तर बस्तियों में प्रविष्ट होने लगा। देखते ही देखते लोगों के बिस्तरों, रसोई और कमरों तक पानी पहुँच गया।
बिना पूर्व सूचना बांध के फाटक खोले जाने का आरोप
स्थानीय निवासियों का गंभीर आरोप है कि इस बाढ़ की सबसे बड़ी वजह चांदील बांध से बिना किसी पूर्व सूचना या अलर्ट जारी किए पानी छोड़ा जाना है।
आमतौर पर जब भी बांध के फाटक खोले जाते हैं, तो प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा तटीय इलाकों में साइरन बजाकर, माइकिंग (मशीन से घोषणा) कराकर या स्थानीय लोगों को अलर्ट जारी करके सूचित किया जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, बीती रात ऐसा कोई अलर्ट या पूर्व चेतावनी जारी नहीं की गई।
अचानक आए इस सैलाब के कारण लोगों को अपने घर का कीमती सामान, राशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का ज़रा भी मौका नहीं मिला। रात के अंधेरे में चीख-पुकार मच गई और लोग अपने बच्चों एवं बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित छतों या ऊंचे इलाकों की तरफ भागने को मजबूर हो गए।
बदहवास और परेशान हैं लोग
सुबह होते-होते स्थिति और भी भयावह दिखने लगी। बागबेड़ा, शास्त्री नगर और शादीपुर के कई घरों में 3 से 6 फीट तक पानी भर चुका है।
- घरों में तबाही: पानी के बहाव के साथ आए कीचड़ और मलबे से घरों में रखा राशन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक सामान पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं।
- पीने के पानी और बिजली का संकट: निचले इलाकों में जलजमाव के कारण एहतियातन विद्युत आपूर्ति (Power Supply) बंद कर दी गई है। इसके अलावा नल और चापाकल पानी में डूब जाने से पीने के साफ पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
- सुरक्षित स्थानों की तलाश: बेघर हुए प्रभावित लोग ऊंचे स्थानों, सड़कों के किनारे या नजदीकी सरकारी/गैर-सरकारी भवनों में शरण लेने को विवश हैं।
प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं सवाल
इस अचानक आई आपदा ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। प्रभावित लोगों में प्रशासन की इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है:
“हर साल मानसून में निचले इलाकों में पानी भरता है, फिर भी चांदील बांध से पानी छोड़े जाने को लेकर कोई बेहतर समन्वय (Coordination) क्यों नहीं बनाया जाता? यदि समय रहते सूचना दे दी जाती, तो कम से कम सामान और मवेशियों को बचाया जा सकता था।”
तत्काल राहत और मुआवजे की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत कार्य चलाए जाने की सख्त ज़रूरत है। स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों ने मांग की है कि:
- तत्काल राहत शिविर: बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन और तिरपाल (Tarpaulin) की तुरंत व्यवस्था की जाए।
- चिकित्सा सुविधाएं: पानी जमा होने से फैलने वाली बीमारियों (जैसे हैजा, त्वचा रोग, डेंगू) से बचाव के लिए चिकित्सा शिविर लगाए जाएं।
- मुआवजा: जिन परिवारों का सामान, घर और राशन पूरी तरह तबाह हो चुका है, उन्हें सरकार और प्रशासन द्वारा उचित मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल, नदियों के जलस्तर पर नज़र रखी जा रही है, लेकिन यदि चांदील बांध से पानी का बहाव कम नहीं हुआ या क्षेत्र में भारी बारिश जारी रही, तो आने वाले घंटों में जमशेदपुर के अन्य निचले इलाकों में भी स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।