बरहेट क्षेत्र में NGT नियमों को दरकिनार कर जारी अवैध बालू खनन और प्रशासनिक उदासीनता

झारखंड में पर्यावरण संरक्षण और एनजीटी (National Green Tribunal) के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। सरकारी नियमों के अनुसार, अवैध बालू खनन पर प्रति हेक्टेयर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। हालांकि, साहिबगंज जिले के बरहेट विधानसभा क्षेत्र स्थित कुसमा नदी के तटीय इलाकों में जमीनी स्थिति इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। यहां बिना किसी वैध चालान या अनुमति के बड़े पैमाने पर अवैध बालू का उठाव जारी है, जिससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
पर्यावरण नियमों की अनदेखी और नदी का क्षरण
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और जलस्तर को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक आधार पर बालू खनन के नियम निर्धारित किए हैं। मानसून के दौरान और बिना स्वीकृत चालान के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। इसके बावजूद, कुसमा नदी में साल के बारहो महीने अवैध उत्खनन जारी रहने की शिकायतें आ रही हैं। नदी के तटबंधों और सतह से अनियंत्रित रूप से बालू निकालने के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके साथ ही, भू-जल स्तर गिरने और तटीय क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
जनजीवन और बुनियादी ढांचे पर पड़ता असर
अवैध बालू के इस कारोबार का सबसे प्रत्यक्ष और गंभीर असर स्थानीय ग्रामीणों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। दिन-रात भारी मात्रा में बालू लादकर दौड़ने वाले ओवरलोडेड ट्रैक्टरों के कारण कुसमा गांव और आसपास के संपर्क मार्गों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें वर्षा का पानी जमा होने से आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं होती रहती हैं। राहगीरों, स्कूली बच्चों और मरीजों के लिए इन रास्तों से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। इसके अलावा, वाहनों की लगातार आवाजाही से धूल और प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल और सांठगांठ के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन को रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र इस स्थिति की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। बालू के अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों का मनोबल इस कदर बढ़ा हुआ है कि वे स्थानीय पुलिस और प्रशासन की शह पर काम करने का खुला दावा करते हैं। ग्रामीणों की शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता है और विरोध करने वाले लोगों को धमकियां दी जाती हैं। प्रशासनिक अमले की इस कथित निष्क्रियता से क्षेत्र के लोगों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता
बरहेट विधानसभा क्षेत्र राज्य के मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व क्षेत्र होने के कारण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी स्वयं शीर्ष नेतृत्व के पास हो, वहां इस तरह की अवैध गतिविधियां बेरोक-टोक कैसे जारी हैं?
साहिबगंज जिला प्रशासन, जिला पुलिस कप्तान और खनन विभाग को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। NGT के मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केवल कागजी दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धरातल पर पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है। अवैध खनन स्थलों पर नियमित छापेमारी, अवैध परिवहन में संलिप्त वाहनों की जब्ती और इस पूरे तंत्र को संरक्षण देने वाले अधिकारियों व माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई से ही कानून का भय स्थापित किया जा सकता है।
पर्यावरण की सुरक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा के हित में आवश्यक है कि जिला प्रशासन तुरंत संज्ञान ले और कुसमा नदी को अवैध खनन के दलदल से बाहर निकालने के लिए ठोस कदम उठाए।

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