विश्व आदिवासी दिवस: पोड़ैयाहाट में सांस्कृतिक छटा के बीच गूंजी मांदर की थाप, अधिकारों की रक्षा का लिया गया संकल्प

पोड़ैयाहाट (गोड्डा): विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड कार्यालय परिसर में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, ढोल-मांदर की गूंज और लोकसंस्कृति की अद्भुत छटा के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में पूरा परिसर उत्सव के माहौल में डूब गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के प्रबुद्ध जन, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक पदाधिकारी, बड़ी संख्या में महिलाएं एवं स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए।
अतिथियों का हुआ पारंपरिक स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथियों का आदिवासी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) फुलेश्वर मुर्मू, झामुमो जिलाध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल सहित कई अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। अतिथियों को पारंपरिक शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
जल, जंगल और जमीन’ की रक्षा पर बल
मंच पर मौजूद अतिथियों एवं वक्ताओं ने आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत, भाषा और अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पहचान, जल-जंगल-जमीन से जुड़े सरोकारों और अधिकारों की रक्षा के प्रति संकल्पबद्ध होने का दिन है।
विधायक प्रदीप यादव और बीडीओ फुलेश्वर मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समुदाय का पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति के प्रति उनका प्रेम और जीवनशैली पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। आधुनिकता के इस दौर में अपनी मूल संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए पारंपरिक आदिवासी लोकगीत और नृत्य रहे। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल, मांदर और बांसुरी की धुनों पर ऐसी प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। लोकनृत्यों के माध्यम से आदिवासी जीवन दर्शन, प्रकृति से उनके जुड़ाव और संघर्ष की सुंदर झांकी पेश की गई। संगीत और नृत्य की थाप पर कई ग्रामीण भी झूमते नजर आए, जिससे माहौल और अधिक जीवंत हो उठा।
9 अगस्त का महत्व और पृष्ठभूमि
संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस दिवस के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि 9 अगस्त को दुनिया भर में विश्व आदिवासी (स्वदेशी) दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों, उनकी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और परंपराओं को मानवाधिकारों के तहत सुरक्षा और सम्मान देना है। पोड़ैयाहाट में हुआ यह आयोजन इसी अंतरराष्ट्रीय संदेश को स्थानीय स्तर पर साकार करता दिखा।
एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि समाज अपनी जड़ों को मजबूत करने और अधिकारों के प्रति जागरूक होने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
तमाम औपचारिकताओं, संबोधनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ यह कार्यक्रम आदिवासी एकता, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का एक अनूठा प्रतीक बन गया।
